चंडीगढ़। देश के तेजी से बढ़ते शहरों में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए अपना पक्का घर अब सिर्फ रहने की सुविधा तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) के जरिए सरकार शहरी गरीबों को स्थायी संपत्ति के साथ सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देने पर भी जोर दे रही है। योजना के तहत बड़ी संख्या में मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि लाखों मकान अभी निर्माणाधीन हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 13 जुलाई 2026 तक PMAY-U और PMAY-U 2.0 के तहत 1.27 करोड़ मकानों को मंजूरी दी जा चुकी थी। इनमें से 1.21 करोड़ मकान निर्माणाधीन थे, जबकि 99.07 लाख मकानों का निर्माण पूरा कर उन्हें लाभार्थियों को सौंपा जा चुका था।

कुछ ही हफ्तों में 47 हजार से अधिक मकान पूरे
PMAY-U के आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 में पूर्ण हो चुके मकानों की संख्या 98.60 लाख थी। जुलाई के मध्य तक यह आंकड़ा बढ़कर 99.07 लाख हो गया। यानी कुछ ही हफ्तों में करीब 47 हजार नए मकान पूरे किए गए।
यह योजना शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है।
महिलाओं के नाम घर का स्वामित्व
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी की एक खास विशेषता मकानों के स्वामित्व में महिलाओं की भागीदारी है। सरकार के मुताबिक, अगस्त 2026 तक मंजूर 1.25 करोड़ से अधिक मकानों में करीब एक करोड़ मकान महिला मुखिया के नाम या संयुक्त स्वामित्व में हैं।
मकान महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में होने से परिवार की संपत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी मजबूत होती है। इससे आवास योजना को सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण से भी जोड़ा जा रहा है।
PMAY-U 2.0 में एक करोड़ और परिवारों का लक्ष्य
सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के दूसरे चरण PMAY-U 2.0 के तहत शहरी परिवारों के लिए आवास सुविधा का दायरा और बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस चरण में एक करोड़ अतिरिक्त शहरी परिवारों को कवर करने की योजना है।
इसका उद्देश्य शहरों में रहने वाले ऐसे परिवारों तक आवास सुविधा पहुंचाना है, जिन्हें अभी तक पक्का और सुरक्षित घर उपलब्ध नहीं हो पाया है। बढ़ते शहरीकरण के बीच सरकार के सामने किफायती आवास उपलब्ध कराने की चुनौती भी लगातार बढ़ रही है।
आवास योजना से संपत्ति और सुरक्षा दोनों
PMAY-U के तहत तैयार किए जा रहे मकान शहरी गरीब परिवारों के लिए केवल छत का साधन नहीं हैं। अपना घर मिलने से परिवारों को एक स्थायी संपत्ति मिलती है, जो भविष्य में आर्थिक सुरक्षा का आधार भी बन सकती है।
महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व वाले मकानों की बड़ी संख्या इस योजना के सामाजिक प्रभाव को भी रेखांकित करती है। वहीं, PMAY-U 2.0 के जरिए अगले चरण में अधिक शहरी परिवारों को योजना के दायरे में लाने की तैयारी है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है?
0 लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी
