नई दिल्ली। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शुक्रवार को विपक्षी राजनीतिक दलों से अपील की कि यदि उन्हें लगता है कि चुनाव प्रक्रिया में धांधली हो रही है, तो उन्हें ऐसे चुनावों में हिस्सा लेना बंद कर देना चाहिए।
X पर पोस्ट करते हुए दिपके ने कहा कि विपक्षी दल एक तरफ चुनावों में धांधली का आरोप लगाते हैं और दूसरी तरफ उन्हीं चुनावों में हिस्सा लेते हैं। उनके अनुसार, लगातार चुनाव लड़ने से ऐसी चुनाव प्रक्रिया को वैधता मिलती है और यह धारणा बनी रहती है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं।
दिपके ने सवाल उठाया कि क्या विपक्षी दल राजनीतिक अस्तित्व खत्म होने के डर से चुनावों में हिस्सा लेते रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट चोरी, विधायकों और सांसदों को तोड़ने तथा राजनीतिक दलों को बांटने जैसी परिस्थितियों के बीच केवल चुनाव लड़ते रहना राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने का तरीका नहीं है।

उन्होंने विपक्षी दलों पर चुनावी धांधली के मुद्दे को चुनिंदा तरीके से उठाने का आरोप भी लगाया। दिपके ने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया में धांधली हो रही है तो इसका विरोध राज्य या राजनीतिक दल को देखकर नहीं होना चाहिए।
फिक्स्ड क्रिकेट मैच का उदाहरण देते हुए दिपके ने कहा कि किसी मुकाबले को आखिरी ओवर तक करीबी दिखाया जा सकता है और कुछ जीत भी दी जा सकती हैं, ताकि प्रक्रिया वास्तविक मुकाबले जैसी लगे। उन्होंने इसी उदाहरण के आधार पर दावा किया कि कुछ चुनावी जीत विपक्षी दलों को चुनावी प्रक्रिया में बनाए रखने के लिए दी जा सकती हैं।
दिपके ने विपक्षी दलों से राजनीतिक हितों से ऊपर लोकतंत्र को रखने और कथित धांधली वाले चुनावों में हिस्सा नहीं लेने की अपील की।
इससे एक दिन पहले दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी और मांग पूरी नहीं होने पर ‘जंतर-मंतर 2.0’ आंदोलन शुरू करने की बात कही थी।
यह बयान द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने तथा मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव से जुड़े मामले शामिल थे।
वहीं, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने राज्यों में मतदाता सूची की सफाई और मतदाता डेटाबेस के प्रबंधन के दौरान लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए थे। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, SIR समेत आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं।
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