गुरुग्राम: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने SIR को लेकर कांग्रेस और विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। गुरुग्राम में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने विपक्ष पर बिना तथ्यों और सबूतों के लोगों को भ्रमित करने का आरोप लगाया। सैनी ने कहा कि विपक्ष को किसी भी मुद्दे पर अपनी बात तथ्यों और प्रमाणों के साथ रखनी चाहिए।
SIR को लेकर चुनाव आयोग की स्थिति का हवाला
मुख्यमंत्री ने SIR को लेकर चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि आयोग अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 6 नवंबर को प्रकाशित की जानी है।
कांग्रेस के पुराने कार्यकाल पर भी निशाना
नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस के पिछले शासनकाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बिजली और किसानों से जुड़ी पुरानी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के लोग कांग्रेस के कार्यकाल की परेशानियों को भूले नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है और पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत है।
बोले- विपक्ष को तथ्यों के साथ सवाल उठाने चाहिए

सैनी ने विपक्ष की भूमिका को लेकर कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने और उसकी नीतियों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाते समय विपक्ष को प्रमाण भी सामने रखने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से “कीचड़ से बाहर निकलने” और तथ्यों के आधार पर राजनीति करने की अपील की।
राहुल गांधी पर CM सैनी की तीखी टिप्पणी
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए नायब सिंह सैनी ने सवाल किया कि राहुल गांधी को कौन स्क्रिप्ट दे रहा है। इसी दौरान उन्होंने कहा, “कांग्रेस को किसी अच्छे पंडित से हवन करवाकर राहुल की बुद्धि की शुद्धि करवानी चाहिए।”
2029 के चुनाव का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने 2029 के चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि जनता कांग्रेस और विपक्ष को जवाब देगी। उन्होंने विपक्ष पर देश को कमजोर करने वाली राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
सैनी ने राहुल गांधी पर युवाओं को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को आरोप लगाने की राजनीति के बजाय तथ्यों के आधार पर मुद्दे उठाने चाहिए।
चुनाव आयोग के सम्मान की अपील
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग को संवैधानिक संस्था बताते हुए उसके सम्मान की बात कही। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और CAG किसी राजनीतिक दल या सरकार के नहीं हैं, बल्कि इन संस्थाओं की विश्वसनीयता देश और लोकतांत्रिक व्यवस्था की संपत्ति है।
उन्होंने कहा कि संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन गंभीर आरोपों के लिए ठोस सबूत भी सामने रखे जाने चाहिए।
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