हरियाणा। धान की खरीद शुरू होने के साथ ही प्रदेश सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई तेज करने की तैयारी की है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के तहत पराली जलाने की रोकथाम के लिए राज्य की कार्ययोजना की समीक्षा की |
सरकार के अनुसार, हर जिले और ब्लॉक स्तर पर विशेष ‘पराली प्रोटेक्शन फोर्स’ तैनात की जाएगी। इसके साथ ही देर शाम गश्त बढ़ाई जाएगी और खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा।

ड्रोन आधारित निगरानी के लिए हरियाणा सरकार Drone Imaging and Information Service of Haryana (DRIISHYA) के सहयोग से व्यवस्था कर रही है। संबंधित उपायुक्त पहले से ही उन गांवों और स्थानों को चिन्हित करेंगे, जहां ड्रोन से निगरानी की जाएगी।
सरकार की प्रवर्तन योजना के तहत पराली जलाने का मामला सत्यापित होने पर FIR दर्ज करना, चालान करना और किसान के भूमि रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ करना शामिल है। इसके अलावा नियमों के अनुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) भी लगाया और वसूला जाएगा।
मैदानी स्तर पर निगरानी के लिए प्रदेश में 8,134 गांव स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। हरियाणा में करीब 5,600 गांवों में 6.2 लाख पंजीकृत धान किसान हैं, जो लगभग 34.1 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती करते हैं। अब तक नोडल अधिकारियों ने 6.04 लाख किसानों को कवर किया है।
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों, उपायुक्तों और मैदानी अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाए रखने, जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने और पराली जलाने की हर सत्यापित घटना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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