नई दिल्ली। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए होने वाले भुगतान को लेकर 15 अक्टूबर से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की बात सामने आई है। हालांकि, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के अनुसार ₹2,000 तक के UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। यह कुल मर्चेंट पेमेंट का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बताया गया है।
शुल्क केवल ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा लेनदेन पर लागू होगा और यह भी बड़े दुकानदारों व कारोबारियों से लिया जाएगा। महीने में ₹1 लाख तक UPI QR कोड के जरिए भुगतान लेने वाले छोटे दुकानदारों के लिए भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा।
UPI भुगतान पर MDR की दर 0.4 प्रतिशत रखी गई है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम शुल्क ₹300 होगा। यह शुल्क ग्राहक से नहीं, बल्कि दुकानदार से लिया जाएगा।
रेलवे टिकट, बीमा प्रीमियम, बिजली-पानी के बिल, पेट्रोल पंप और स्कूल-कॉलेज की फीस जैसे भुगतान पर ₹5 का स्थायी शुल्क निर्धारित किया गया है, चाहे भुगतान की राशि कितनी भी हो।
बताया गया है कि UPI की MDR दर क्रेडिट और डेबिट कार्ड के मुकाबले कम है। क्रेडिट कार्ड पर दुकानदारों को आमतौर पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत, जबकि डेबिट कार्ड पर करीब 0.9 प्रतिशत शुल्क देना पड़ता है।

एक अनुमान के मुताबिक भारत में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर हर साल करीब ₹20,000 करोड़ खर्च होते हैं। ऐसे में पूर्व-निर्धारित छोटा शुल्क डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और नई तकनीक में निवेश को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकता है।
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