हरियाणा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे, फार्म टूरिज्म, एडवेंचर और विरासत स्थलों पर जोर, सूरजकुंड में अतिरिक्त मेला प्रस्तावित।
हरियाणा अब केवल एक राज्य से दूसरे राज्य तक जाने वाले रास्ते के रूप में नहीं, बल्कि एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य के तौर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विरासत, आध्यात्मिक, ग्रामीण, फार्म, एडवेंचर और सांस्कृतिक पर्यटन को एक साथ विकसित करने की योजना पर जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश सरकार ने पर्यटन को लेकर ‘घूमण आओ, हरियाणा देखो’ संदेश के साथ नई दिशा तय की है। इसके तहत कोशिश है कि पर्यटक हरियाणा से सिर्फ गुजरें नहीं, बल्कि यहां रुकें, स्थानीय संस्कृति और विरासत को करीब से देखें और अलग-अलग पर्यटन स्थलों का अनुभव लेकर लौटें।
विरासत से लेकर ग्रामीण संस्कृति तक पर फोकस
हरियाणा के अलग-अलग क्षेत्रों को पर्यटन के लिहाज से जोड़ने की तैयारी है। कुरुक्षेत्र की महाभारत और गीता से जुड़ी विरासत, पिंजौर के ऐतिहासिक उद्यान, सूरजकुंड की शिल्प परंपरा, मोरनी की पहाड़ियां और नारनौल-महेंद्रगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन सर्किट से जोड़ने पर जोर है।
इसके साथ ही गांवों की हरियाणवी संस्कृति को भी पर्यटन का हिस्सा बनाने की योजना है। पर्यटन को केवल होटल और पर्यटन परिसरों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय लोगों, किसानों, शिल्पकारों, गाइड, टैक्सी संचालकों, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
पारंपरिक हाईवे टूरिज्म से आगे बढ़कर विरासत, आध्यात्मिक एवं तीर्थ, इको, एडवेंचर, ग्रामीण एवं फार्म टूरिज्म, होमस्टे, गोल्फ और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 20 पर्यटन हब और गंतव्य क्षेत्रों की पहचान की गई है।

गांव और खेत भी बनेंगे पर्यटन केंद्र
ग्रामीण और फार्म टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 38 फार्म टूरिज्म डेस्टिनेशन और 11 होमस्टे पंजीकृत हैं।
इन स्थानों के जरिए पर्यटकों को गांव का जीवन, खेती-किसानी, स्थानीय खान-पान, लोक संस्कृति और हरियाणवी मेहमाननवाजी का अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
यानी पर्यटन का दायरा शहरों के बड़े होटल और प्रमुख स्थलों से आगे बढ़ाकर गांवों और खेतों तक ले जाने की तैयारी है।
सूरजकुंड में साल में दो बार मेले की तैयारी
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले को केवल सालाना आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे वर्षभर सक्रिय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
मेला परिसर में विवाह और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के साथ-साथ सितंबर से दिसंबर के बीच एक अतिरिक्त मेले के आयोजन का प्रस्ताव है। इससे सूरजकुंड को पूरे साल पर्यटकों और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना है।
पर्यटन कैलेंडर में सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला, बैसाखी उत्सव, पिंजौर आम मेला, तीज उत्सव, सूरजकुंड दीपावली मेला, भक्ति-सूफी उत्सव, अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव, हरियाणवी संस्कृति उत्सव और खाद्य उत्सव जैसे आयोजनों को शामिल किया गया है।
AI गाइड से पर्यटन को मिलेगा तकनीक का साथ
पर्यटन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए एआई आधारित ‘सरस्वती’ डिजिटल गाइड को भी पर्यटन से जोड़ा गया है।
वहीं कुरुक्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में ज्योतिसर में महाभारत अनुभव केंद्र और विराट स्वरूप लाइट एंड साउंड शो तैयार किया गया है।
एडवेंचर टूरिज्म पर भी जोर
हरियाणा में एडवेंचर टूरिज्म के लिए हथिनीकुंड बैराज, टिक्कर ताल और रोहतक की तिल्यार झील को एडवेंचर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
यहां वाटर स्पोर्ट्स, बोटिंग, बनाना बोट, जेट स्कीइंग और कैंपिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। इसके अलावा ढोसी की पहाड़ियों पर रोपवे का निर्माण भी प्रगति पर बताया गया है।
हरियाणा पर्यटन निगम के पास 42 पर्यटन परिसर
विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा के अनुसार, हरियाणा पर्यटन निगम के पास 42 पर्यटन परिसरों का नेटवर्क है। इसके अलावा 42 रेस्टोरेंट, पांच फास्ट फूड सेंटर और 15 पेट्रोल पंप संचालित किए जा रहे हैं।
पर्यटकों को सीधे जानकारी उपलब्ध कराने के लिए शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, मोहाली के आगमन टर्मिनल पर पर्यटक सूचना एवं सुविधा केंद्र भी शुरू किया गया है। यहां पर्यटकों को पर्यटन एवं विरासत स्थलों, आध्यात्मिक केंद्रों, पर्यटन सर्किट, होटल-रिसॉर्ट, मेलों, उत्सवों और बुकिंग से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
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