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अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर ED का बड़ा एक्शन—140 करोड़ की संपत्ति जब्त

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय की लगभग ₹140 करोड़ मूल्य की संपत्ति को जब्त कर लिया है। ईडी का दावा है कि यह संपत्तियाँ अपराध से अर्जित धन से बनाई गईं थीं।

यह कार्रवाई जिले के धौज गांव में स्थित यूनिवर्सिटी परिसर पर की गई, जिसमें 54 एकड़ जमीन, शैक्षणिक इमारतें, हॉस्टल, प्रशासनिक भवन सहित पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल है।


मनी लॉन्ड्रिंग जांच में क्या मिला?

ईडी की प्रारंभिक जांच के अनुसार:

  • अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से अवैध धन को वैध दिखाकर संस्थान के विकास में लगाया गया।
  • यह धन कई खातों और जटिल लेन-देन के जरिए घुमाया गया।
  • एजेंसी के मुताबिक यह प्रक्रिया मनी लॉन्ड्रिंग की परिभाषा में स्पष्ट रूप से आती है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेज़ों, बैंक लेन-देन और गवाहों के आधार पर यह स्थापित हुआ कि यूनिवर्सिटी का निर्माण कानूनी स्रोतों से अर्जित धन से मेल नहीं खाता।


चेयरमैन समेत कई पर चार्जशीट

ईडी ने इस केस में:

के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।

ईडी की कार्रवाई का उद्देश्य है कि:

  • जांच के दौरान संपत्तियाँ न बेची जाएं,
  • न ट्रांसफर हों,
  • और न ही किसी अन्य माध्यम से अलग की जा सकें।

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पुराने धमाका केस से कनेक्शन

सूत्रों के अनुसार:

  • यह पूरा मामला दिल्ली के एक पुराने धमाका केस की जांच से जुड़ा है।
  • उसी जांच में ईडी को वित्तीय अनियमितताओं के कई सुराग मिले।
  • इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आया और कार्रवाई शुरू हुई।

हालांकि इस लिंक की अभी औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है।


ईडी का आधिकारिक बयान

ईडी ने बताया:

“जांच अभी जारी है। यदि आगे और सबूत मिलते हैं तो अतिरिक्त संपत्तियों को भी अटैच किया जा सकता है। मामला अदालत में विचाराधीन है।”

अब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जा रहा है कि प्रबंधन अदालत में अपनी कानूनी रणनीति पेश करेगा।


क्यों है यह मामला महत्वपूर्ण?

मामले का लिंक पुराने धमाका केस से होने के कारण जांच का दायरा और भी गंभीर माना जा रहा है।

एक बड़े निजी शैक्षणिक संस्थान पर ईडी की यह कार्रवाई अभूतपूर्व मानी जा रही है।

शिक्षा संस्थान के निवेश मॉडल और ट्रस्ट-आधारित फंडिंग पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

यदि आरोप सिद्ध हुए, तो यह देशभर के निजी ट्रस्ट मॉडल्स के लिए मिसाल बन सकता है।

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