नोएडा में 12 वर्षीय बच्चे की आत्महत्या: टीवी कनेक्शन कटने और मां की डांट से उदासी ने ली जान
बच्चे की मौत से दहला नंगला चरणदास गांव
नोएडा के फेज-2 थाना क्षेत्र के नंगला चरणदास गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां 12 वर्षीय अमित उर्फ गोलू ने घर में अकेले रहते हुए फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के दौरान उसकी मां काम पर गई थी और बहन स्कूल में थी।
घर पहुंची बहन ने गोलू को पंखे से लटका देखा, जिसके बाद पूरे परिवार में मातम छा गया।
टीवी कनेक्शन कटने और पढ़ाई को लेकर था परेशान
परिवार के मुताबिक, गोलू कुछ समय से पढ़ाई से दूरी बना रहा था और लगातार टीवी देखता रहता था। उसकी मां संध्या—जो नोएडा सेक्टर 81 में घरेलू सहायिका के रूप में काम करती हैं—ने उसे कई बार समझाया, लेकिन गोलू अक्सर उनकी बात नज़रअंदाज़ कर देता था।
अंततः, महिला ने कुछ दिन पहले टीवी कनेक्शन कटवा दिया था ताकि बच्चा पढ़ाई पर ध्यान दे सके।
मां की डांट का गुस्सा और टीवी न देखने की नाराजगी गोलू के भीतर बढ़ती जा रही थी। सोमवार को उसे डांट पड़ी, और मंगलवार को उसने कमरे में फांसी लगा ली।
परिवार पहले से संघर्ष कर रहा था
गोलू के पिता संजय की 2015 में मृत्यु हो चुकी है। परिवार का पूरा भार मां संध्या के कंधों पर है।
संध्या अपने बेटे को पढ़ाकर इंजीनियर बनाना चाहती थी, लेकिन गोलू पिछले कुछ महीनों से न तो स्कूल जा रहा था और न ही पढ़ाई में रुचि दिखा रहा था।
सीसीटीवी और फोरेंसिक जांच के आधार पर पुलिस ने बताया कि यह मामला फिलहाल आत्महत्या का ही लग रहा है। कोई संदिग्ध गतिविधि या सुसाइड नोट नहीं मिला है।
गाजियाबाद में 3 बहनों की आत्महत्या के बाद अब दूसरी घटना
दो दिन पहले गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या ने पूरे NCR को झकझोर दिया था—जहां बच्चियों ने मां द्वारा ऑनलाइन गेम्स रोकने पर नौवीं मंजिल से छलांग लगा दी थी।
अब, नोएडा में यह दूसरी घटना बच्चों की मानसिक स्थिति और डिजिटल आदतों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 10–16 वर्ष के बच्चों में भावनात्मक अस्थिरता, फोन/गेमिंग/टीवी का अतिशय उपयोग और पढ़ाई का दबाव कई बार मानसिक तनाव को बढ़ा देता है।
फोरेंसिक टीम जुटा रही है तथ्य
थाना प्रभारी अवधेश प्रताप सिंह ने बताया:
- फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठे किए
- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत हैंगिंग से होने की पुष्टि
- परिवार ने किसी के खिलाफ शिकायत नहीं दी
- पुलिस अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच कर रही है
त्रासदी ने उठाए अहम सवाल
यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि—
- बच्चों की मानसिक हेल्थ को लेकर परिवार और समाज में जागरूकता कितनी कम है
- स्क्रीन टाइम और डिजिटल सामग्री बच्चों के व्यवहार पर गहरा प्रभाव डाल रही है
- बच्चों का अकेले घर पर रहना और गुस्सैल स्वभाव समय पर पहचानने की आवश्यकता है
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्कूल, माता-पिता और समाज को बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
