जींद में हलवाई यूनियन की बैठक: फरवरी की शादियों पर पड़ सकता है सीधा असर
जींद में आज हलवाई यूनियन की अहम बैठक हुई, जिसमें आगामी फरवरी माह में होने वाली शादियों को लेकर बड़े बदलावों के संकेत मिले हैं। बैठक में काम के समय, मेहनताना और बारात की टाइमिंग जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई, जिसका असर आने वाले शादी समारोहों पर साफ दिखाई दे सकता है।
12 जनवरी को होगा यूनियन चुनाव, फैसले पर लगेगी मुहर
हलवाई यूनियन के सूत्रों के अनुसार 12 जनवरी को जींद के दालमवाला होटल में यूनियन के प्रधान व अन्य पदाधिकारियों का चुनाव होगा। इसी बैठक में हलवाईयों से जुड़ी अन्य समस्याओं और नए नियमों पर अंतिम चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा।
काम के समय को लेकर उठे सवाल
आमतौर पर शादी समारोहों में हलवाई सुबह करीब 4 बजे काम शुरू कर देते हैं। बारात के भोजन के बाद ही उनका आधा काम पूरा माना जाता है। लेकिन कई बार बारात के देरी से पहुंचने पर हलवाई और स्टाफ को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे थकान और अतिरिक्त मेहनत बढ़ जाती है।
देर होने पर अलग चार्ज की मांग
सूत्रों के मुताबिक अब यूनियन की ओर से यह मांग उठाई गई है कि यदि बारात समय पर नहीं आती और शाम 6 बजे के बाद भी हलवाई, वेटर व अन्य स्टाफ को रुकना पड़ता है, तो उन्हें 1.5 दिन का मेहनताना दिया जाए। इतना ही नहीं, बारात की देरी पर अलग चार्ज लेने का भी प्रस्ताव रखा जा रहा है।
शादी के खर्च पर पड़ेगा असर
अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो फरवरी में होने वाली शादियों का खर्च बढ़ना तय माना जा रहा है। खासकर उन परिवारों पर असर पड़ेगा, जिनकी शादियों में बारात की टाइमिंग तय समय से आगे-पीछे होती है।
ठेकेदारों को हो सकता है सबसे ज्यादा नुकसान
इस बदलाव से सबसे ज्यादा नुकसान शादी समारोहों के ठेकेदारों को हो सकता है। ठेकेदार आमतौर पर खाने-पीने और अन्य व्यवस्थाओं के लिए फिक्स रकम लेते हैं। यदि बारात की देरी के कारण उन्हें हलवाई, वेटर और स्टाफ को 1.5 दिन का मेहनताना देना पड़ा, तो उनकी लागत बढ़ जाएगी और मुनाफा कम हो सकता है।
आने वाले दिनों में साफ होगी तस्वीर
फिलहाल सभी की निगाहें 12 जनवरी को होने वाली यूनियन बैठक पर टिकी हैं। उसी दिन यह तय होगा कि ये नियम कब और किस रूप में लागू होंगे। लेकिन इतना साफ है कि अगर हलवाई यूनियन के ये फैसले लागू होते हैं, तो जींद समेत आसपास के इलाकों में शादी समारोहों की योजना और बजट दोनों पर असर पड़ना तय है।

