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अनिल विज के विभाग में ₹1500 करोड़ का बड़ा घोटाला, फर्जी रजिस्ट्रेशन से हुआ सरकारी धन का दुरुपयोग

हरियाणा सरकार के श्रम विभाग में करीब ₹1500 करोड़ के कथित घोटाले का मामला सामने आया है। यह खुलासा खुद हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

यह घोटाला हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि विभाग में बड़े पैमाने पर फर्जी श्रमिक रजिस्ट्रेशन और वर्क-स्लिप (Work Slip) जारी की गईं, जिनके जरिए सरकारी कल्याण योजनाओं का गलत तरीके से लाभ उठाया गया।

वर्क-स्लिप वह दस्तावेज होती है, जिसके आधार पर निर्माण श्रमिकों को सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलता है।

जांच में क्या सामने आया?

विभागीय सत्यापन में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं—

कुल 5,99,758 वर्क-स्लिप की जांच की गई

इनमें से केवल 53,249 वर्क-स्लिप ही वैध पाई गईं

जबकि 5,46,509 वर्क-स्लिप फर्जी निकलीं

इतना ही नहीं, श्रमिक रजिस्ट्रेशन की जांच में भी भारी गड़बड़ी उजागर हुई—

कुल 2,21,517 श्रमिक रजिस्ट्रेशन

इनमें से सिर्फ 14,240 श्रमिक वास्तविक पाए गए

1,93,756 रजिस्ट्रेशन फर्जी निकले

कितने रुपये का हुआ नुकसान?

अनिल विज के अनुसार, एक फर्जी लाभार्थी को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत औसतन ₹2 से ₹2.5 लाख तक का लाभ मिल सकता है। इसी आधार पर अनुमान लगाया गया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को लगभग ₹1500 करोड़ का नुकसान हुआ है।

किन जिलों में हुई जांच?

अब तक हरियाणा के 13 जिलों में 100% सत्यापन पूरा किया जा चुका है, जिनमें—

करनाल, गुरुग्राम, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, झज्जर, रेवाड़ी, नूंह, महेंद्रगढ़, पलवल, पंचकूला, सिरसा और कैथल शामिल हैं।
अन्य जिलों में जांच अभी जारी है।

मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी में क्या कहा?

अनिल विज ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि यह मामला संगठित घोटाले की ओर इशारा करता है और इसकी जांच SIT या किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।

किन योजनाओं में हुआ फर्जी लाभ?

फर्जी रजिस्ट्रेशन के जरिए जिन योजनाओं का गलत लाभ उठाया गया, उनमें—

शिक्षा व छात्रवृत्ति सहायता

विवाह सहायता योजना

मातृत्व लाभ

पेंशन योजना

चिकित्सा सहायता

आवास व दुर्घटना मुआवजा

जैसी कई योजनाएं शामिल हैं।

आगे क्या?

अब सभी की नजर मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में SIT गठित हो सकती है और दोषियों के खिलाफ एफआईआर, रिकवरी और सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

₹1500 करोड़ का यह कथित घोटाला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण माना जा रहा है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह हरियाणा के सबसे बड़े श्रम विभागीय घोटालों में से एक होगा।

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