कुरुक्षेत्र गीता जयंती पर विवाद — ताऊ जलेबी वाला बोला: 6 से 14 लाख किराया कहां से दूं, यहां आस्था नहीं कारोबार चल रहा है
कुरुक्षेत्र में गीता जयंती महोत्सव शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गया है।
मामला दुकानों के किराया दरों को लेकर सामने आया है।
प्रसिद्ध ताऊ जलेबी वाला ने मंच से और मीडिया के सामने कहा कि
“यहां श्रद्धा नहीं, केवल इनकम देखी जा रही है।”
🧾 क्या कहा ताऊ जलेबी वाले ने
ताऊ जलेबी वाला, जो हर साल गीता जयंती मेले में दुकान लगाता है,
ने इस बार प्रशासन और आयोजन कमेटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उसका कहना है —
“मैं देसी घी की जलेबी बनाता हूं।
मेरी दुकान की कमाई कितनी होगी, यह सब जानते हैं।
लेकिन जब मैं पहुंचा तो पता चला कि एक दुकान का किराया 14 लाख रुपये है,
और तीन नंबर की दुकान का 6 लाख रुपये।
बताओ, मैं 21 दिन में इतना खर्च निकालकर क्या कमा पाऊंगा?”
उसने आगे कहा —
“यह कोई श्रद्धा का उत्सव नहीं रहा,
यहां तो जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है।
छोटे दुकानदार यहां कैसे टिक पाएंगे?”
किराया दरों पर उठा सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष गीता जयंती मेले में दुकानों के किराए में भारी बढ़ोतरी की गई है।
जहां पिछले साल छोटे दुकानदारों को ₹1–2 लाख तक में दुकानें मिलती थीं,
वहीं इस बार यह रकम ₹6 लाख से ₹14 लाख तक पहुंच गई है।
इससे कई छोटे व्यवसायी परेशान हैं और दुकान लगाने से पीछे हट रहे हैं।
ताऊ जलेबी वाले का कहना है कि
“जब जनता खुद महंगाई से जूझ रही है, तो यहां इतनी ऊंची फीस वसूलना अन्याय है।”
आयोजकों पर भी सवाल
स्थानीय व्यापारी संगठनों का कहना है कि
आयोजन समिति और नगर प्रशासन को इस मामले पर
पारदर्शी नीति अपनानी चाहिए।
उनका कहना है कि “धार्मिक आयोजन का उद्देश्य जनभावना और संस्कृति का प्रसार होना चाहिए,
न कि आर्थिक बोझ डालना।”
एक दुकानदार ने कहा —
“यहां तो दुकानें उन्हीं को मिलेंगी जिनके पास पैसे हैं।
छोटे व्यापारी बाहर कर दिए गए हैं।”
गीता जयंती का महत्व और वर्तमान विवाद
कुरुक्षेत्र की गीता जयंती देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक भव्य आयोजन होती है।
हर साल हजारों दुकानें, फूड स्टॉल, धार्मिक प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
लेकिन इस बार बढ़े हुए किराए और व्यवस्था को लेकर
स्थानीय व्यापारियों में असंतोष फैल गया है।
ताऊ जलेबी वाला ने कहा —
“मैं 40 साल से यहां आ रहा हूं,
लेकिन ऐसा पहली बार देखा कि
श्रद्धा से ज्यादा पैसा देखा जा रहा है।”
सरकार से उम्मीदें
व्यापारियों ने हरियाणा सरकार और जिला प्रशासन से अपील की है कि
छोटे दुकानदारों के लिए किराए में रियायत दी जाए
और फूड व ट्रेड स्टॉल के लिए समान दर नीति लागू की जाए।
कई लोगों का कहना है कि
यदि यह स्थिति जारी रही तो आने वाले सालों में
स्थानीय व्यवसायी मेले से बाहर हो जाएंगे,
और आयोजन केवल कॉर्पोरेट स्तर का रह जाएगा।

निष्कर्ष
ताऊ जलेबी वाले के बयान ने एक गंभीर प्रश्न खड़ा किया है —
क्या धार्मिक आयोजन अब सिर्फ आय का जरिया बनते जा रहे हैं?
छोटे दुकानदारों की आवाज़ को सुना जाएगा या नहीं,
यह आने वाले दिनों में प्रशासन के फैसलों से स्पष्ट होगा।
“गीता जयंती सिर्फ उत्सव नहीं, विश्वास का प्रतीक है —
इसे मुनाफे के बाजार में नहीं बदलना चाहिए।”
