पीएम मोदी ने कहा — दिल्ली धमाके के गुनहगारों को सज़ा मिलेगी, भूटान दौरे में ऊर्जा समझौते पर हस्ताक्षर
नई दिल्ली / थिम्फू, 12 नवंबर 2025 — राजधानी दिल्ली के लाल किला क्षेत्र के पास हुए कार धमाके से देश में हलचल मच गई है। इस हमले में कम से कम 8 लोगों की मौत और 20 से अधिक घायल हुए हैं। जांच एजेंसियों ने मामले को आतंकी हमले के रूप में दर्ज कर लिया है और इसे यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत जांचा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा — “इस घृणित हमले के पीछे जो भी लोग हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। साजिश रचने वालों को सज़ा मिलेगी।”
भूटान से लौटने के तुरंत बाद पीएम मोदी एलएनजेपी अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, वे जल्द ही उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
दिल्ली धमाका — अब तक की जांच
दिल्ली पुलिस और एनआईए ने संयुक्त रूप से जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, धमाके में उपयोग किया गया विस्फोटक RDX मिश्रण हो सकता है।
सुरक्षा एजेंसियां क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं और आस-पास के इलाकों से 10 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह हमला “अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।” हालांकि जांच अभी शुरुआती चरण में है।
पीएम मोदी का भूटान दौरा — ऊर्जा सहयोग को नई दिशा
इसी बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने 11–12 नवंबर को भूटान का दो-दिवसीय दौरा पूरा किया।
दौरे के दौरान भारत ने भूटान को लगभग ₹4,000 करोड़ (US $450 मिलियन) की क्रेडिट लाइन दी, ताकि ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिल सके।
दोनों देशों ने 1,020 मेगावॉट पनतसांगचू-II हाइड्रो प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया — जो भूटान की जलविद्युत क्षमता को लगभग 40% बढ़ा देगा।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत-भूटान साझेदारी “केवल ऊर्जा सहयोग नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की स्थिरता और समृद्धि का आधार है।”
राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव
- सुरक्षा दृष्टि से: दिल्ली धमाके के बाद केंद्र सरकार पर त्वरित कार्रवाई दिखाने का दबाव बढ़ा है।
- विदेश नीति में: भूटान यात्रा से भारत ने यह संदेश दिया कि ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति अब भी प्राथमिकता में है।
- राजनीतिक जोखिम: दिल्ली हाई कोर्ट में पीएम मोदी की डिग्री को लेकर चल रहे विवाद पर भी बहस तेज हो सकती है, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहेंगे।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे जल्द-से-जल्द इस धमाके के मास्टरमाइंड तक पहुँचें और मुकदमे की प्रक्रिया शुरू करें।
वहीं विदेश मोर्चे पर, भारत और भूटान के बीच हुए नए ऊर्जा समझौते को धरातल पर लाना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी।
