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ऑपरेशन ट्रैकडाउन: भगोड़ों पर नज़र, अपराधियों पर शिकंजा

हरियाणा सरकार ने 5 से 20 नवंबर 2025 के बीच एक बड़ा सुरक्षा अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान का नाम रखा गया है “ऑपरेशन ट्रैकडाउन”। आदेशों में कहा गया है कि गोलीबारी, संगठित अपराध और फरार अपराधियों पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय एसएचओ से लेकर डीएसपी और एसपी तक हर अधिकारी को अपने क्षेत्र के टॉप अपराधियों की सूची बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने का बोझ दिया गया है।

सरकारी निर्देशों के अनुसार जिनकी शिनाख्त नहीं हो पाई है, उन्हें चिन्हित कर पहचान कर ली जाए। जिनकी पहचान हो चुकी है पर वे फरार हैं, उन्हें हर हाल में पकड़ा जाए। जिन अपराधियों को जमानत पर छोड़ा गया है, उनकी हिस्ट्री शीट और हाल की गतिविधियों की गहन जांच की जाएगी। अगर वे अपराध में फिर सक्रिय पाए गए तो उनकी जमानत रद्द कराकर कठोर धाराओं के तहत मुक़द्दमा चलाया जाएगा। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि यदि अपराध सुनियोजित तरीके से किए जा रहे हैं तो उन पर संगठित अपराध की धाराएँ लगाई जाएँ और उनकी सम्पत्ति को चिन्हित कर जब्त किया जाए।

आदेश स्पष्ट हैं — केवल गिरफ्तारी ही नहीं, अपराध से अर्जित संपत्ति की जब्ती और अपराध को संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी। जिन अधिकारियों को यह अभियान संभालना है, उनके दायित्व भी स्पष्ट किए गए हैं। SHO और DSP अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय रहेंगे और इलाके के टॉप 5 अपराधियों की सूची बनाएंगे। वहीं हर ज़िला और जोन टीमें टॉप 10 अपराधियों की सूची बनाएंगी और उनकी धर-पकड़ को सुनिश्चित करेंगी। इसके लिए SP, DCP और CP जिम्मेदार होंगे।

राज्य स्तर पर STF (Special Task Force) को भी सक्रिय किया जा रहा है। STF से कहा गया है कि वह पूरे राज्य के टॉप 20 अपराधियों की सूची तैयार करे और उनके विरुद्ध व्यापक ऑपरेशन चलाए। ऑपरेशन ट्रैकडाउन का समन्वय I.G. Crime, श्री राकेश आर्य को दिया गया है। जनता द्वारा मिलने वाली सूचनाएँ भी महत्वपूर्ण मानी गई हैं। इस संदर्भ में एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है — +91 90342 90495, जहाँ जानकारी दी जा सकती है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

ऑपरेशन ट्रैकडाउन में पड़ोसी राज्यों का सहयोग भी मांगा गया है। पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली व चंडीगढ़ के साथ समन्वय कर के फरार अपराधियों को पाताल से भी पकड़ने के निर्देश हैं। आदेश का मकसद स्पष्ट है — अपराधियों को सत्ता या संरक्षण से बचने का मौका न मिले और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित हो।

इस अभियान का तात्कालिक असर स्थानीय तौर पर सुरक्षा बढ़ाने और अपराधियों पर दबाव बनाने में देखा जाएगा। पर विशेषज्ञ याद दिलाते हैं कि सफलता के लिए सिर्फ गिरफ्तारी ही काफी नहीं है। फॉरेंसिक जांच, सबूतों का सटीक संकलन और कोर्ट प्रक्रिया भी तेज़ और पारदर्शी होने चाहिए। यदि सबूत मजबूत होंगे तो मुक़द्दमे पक्के बनेंगे और जेल में सजा तक की प्रक्रिया सुचारू होगी।

स्थानीय लोगों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कई लोग इस कदम का स्वागत कर रहे हैं और कहते हैं कि लंबे समय से कुछ गुंडे और अपराधी खुलेआम आतंक मचा रहे थे। वहीं कुछ नागरिक यह भी चिंतित हैं कि कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित हो और निर्दोष लोगों को प्रभावित न किया जाए। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी कार्रवाई कानूनी दायरे में ही होंगी और मानवाधिकारों का संरक्षण किया जाएगा।

अब देखना यह होगा कि ऑपरेशन ट्रैकडाउन के दौरान कितनी गिरफ्तारियाँ होती हैं और क्या यह अभियान दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ पाता है। क्या ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा का माहौल बेहतर होगा? या अपराधी फिर से नए रास्ते खोज लेंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होंगे। जनता और प्रशासन दोनों की निगाहें इस अभियान पर लगी हुई हैं।

आपकी राय: क्या आप सोचते हैं कि ऐसे ऑपरेशन दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं? नीचे कमेंट में बताएं।

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