देश का पहला हाइड्रोजन प्लांट जींद में तैयार, अक्टूबर में होगा उद्घाटन
भारत जल्द ही रेलवे क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने जा रहा है। हरियाणा के जींद में देश का पहला हाइड्रोजन गैस प्लांट अब लगभग तैयार है और अक्टूबर 2025 में इसका औपचारिक उद्घाटन होने जा रहा है। इस क्रांतिकारी प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे अब हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेनों का संचालन करेगा, जो पर्यावरण के लिए स्वच्छ और ऊर्जा के लिहाज़ से किफायती होंगी।
एमटीआरएस ने किया निरीक्षण – हर यूनिट का लिया जायजा
शनिवार को रेलवे के मेंबर ट्रेक्शन एंड रोलिंग स्टॉक (MTRS) आर. राजा गोपाल ने जींद में निर्माणाधीन हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया। लगभग एक घंटे तक चले निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्लांट की हर यूनिट का बारीकी से जायजा लिया और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान कुछ तकनीकी कमियाँ भी पाई गईं जिन्हें जल्द दूर करने के निर्देश दिए गए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि प्लांट में अब गैस का उत्पादन शुरू हो गया है — जो इस परियोजना के अगले चरण की ओर एक बड़ा कदम है।
आर. राजा गोपाल के साथ पीसीएमई डिंपी गर्ग, ईडीएमई (ENHM & Project) सतीश सिंह और ईडी (RDSO) भी मौजूद रहे। वे सुबह 11:20 बजे रेलवे जंक्शन पहुंचे और सीधे हाइड्रोजन प्लांट का दौरा किया।
आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारी
निरीक्षण के दौरान एमटीआरएस ने कंट्रोल रूम का भी दौरा किया और अधिकारियों से आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की रणनीतियों की जानकारी ली। रेलवे टीम ने उन्हें नक्शे और तकनीकी दस्तावेज़ों के माध्यम से प्लांट के हर पहलू से अवगत कराया।
भारत का पहला हाइड्रोजन गैस प्लांट — क्यों खास है?
जींद रेलवे जंक्शन के पास लगभग 118 करोड़ रुपये की लागत से यह हाइड्रोजन गैस प्लांट तैयार किया जा रहा है। यह प्लांट करीब 2000 वर्गमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और देश में अपनी तरह की पहली परियोजना है।
इस प्लांट से उत्पादित हाइड्रोजन गैस को ट्रेन इंजन में फ्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप ट्रेनें लगभग 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम होंगी।
ट्रेन संचालन की योजना — जींद से सोनीपत तक पहली रफ्तार
हाइड्रोजन प्लांट के चालू होने के बाद, भारतीय रेलवे दो-दो ट्रेनों (8-8 बोगियों वाली) को चलाने की योजना बना रहा है। पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच दौड़ने की तैयारी में है।
हाइड्रोजन ट्रेनें न केवल प्रदूषण रहित होंगी, बल्कि पारंपरिक डीज़ल और इलेक्ट्रिक इंजनों की तुलना में अधिक ऊर्जा दक्ष भी साबित होंगी। इससे भारत के रेल नेटवर्क को हरित ऊर्जा की दिशा में एक नया आयाम मिलेगा।
स्वच्छ भविष्य की ओर भारतीय रेलवे का कदम
हाइड्रोजन ऊर्जा को “ग्रीन एनर्जी” माना जाता है क्योंकि इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है। रेलवे द्वारा इस तकनीक को अपनाना भारत की नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।
यह प्लांट भारतीय रेलवे के “सस्टेनेबल और ग्रीन ट्रांसपोर्ट” के विज़न को साकार करेगा और भविष्य में देशभर में हाइड्रोजन-आधारित ट्रेनों के नेटवर्क को संभव बनाएगा।

निष्कर्ष
जींद में तैयार हो रहा देश का पहला हाइड्रोजन प्लांट भारत को रेलवे तकनीक के नए युग में प्रवेश कराएगा। जैसे ही यह प्लांट अक्टूबर 2025 में चालू होगा, भारतीय रेलवे स्वच्छ, तेज़ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम रखेगा।
अब देश को उस दिन का इंतज़ार है जब जींद से निकलने वाली पहली हाइड्रोजन ट्रेन पटरियों पर दौड़ेगी — और भारत पर्यावरण-मित्र भविष्य की ओर अग्रसर होगा।
