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🛕 राम लला के मंदिर में ध्वजारोहण सम्पन्न — अयोध्या में ऐतिहासिक क्षण

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज़
प्रकाशित: 27 नवंबर 2025

अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में 25 नवंबर 2025 को इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण पल दर्ज हुआ, जब मुख्य शिखर पर धर्म ध्वज फहराया गया। ध्वजारोहण समारोह के साथ राम मंदिर के संपूर्ण निर्माण कार्य की आधिकारिक घोषणा कर दी गई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संत समाज, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे


ध्वजारोहण समारोह—ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

मंदिर के मुख्य शिखर पर 42-फुट ऊँचे ध्वजदंड पर “भगवा धर्म ध्वज” स्थापित किया गया।

ध्वजदंड पर लगभग 21 किलोग्राम सोने की परत चढ़ाई गई, जो मंदिर की भव्यता और पवित्रता का प्रतीक है।

वेद मंत्रों, वैदिक यज्ञ और वैदिक परंपराओं के बीच पूरे अनुष्ठान को सम्पन्न किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा —
“यह ध्वज केवल राम मंदिर का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान का संदेशवाहक है।”


धर्म ध्वज के प्रतीक चिन्ह

मंदिर की ध्वजा पर प्रदर्शित प्रतीक—

ॐ — ऊर्जा और शुद्ध चेतना का संकेत

सूर्य — विजय, प्रकाश और शक्ति

कचनार (कोविदार) — भगवान राम का प्रिय वृक्ष, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक

ये प्रतीक भारत की आध्यात्मिक विरासत और सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना का संदेश देते हैं।


अयोध्या में भव्य भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था

ध्वजारोहण के दौरान लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे।

सुरक्षा के लिए ड्रोन, CCTV और स्पेशल कमांडो तैनात किए गए।

प्रशासन ने ट्रैफिक और दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष योजना लागू की।


पर्यटन और अर्थव्यवस्था को नई गति

विशेषज्ञों के अनुसार, मंदिर के पूर्ण उद्घाटन के बाद अयोध्या में:

देश-विदेश से तीर्थ यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचेगी।

होटल, ट्रांसपोर्ट, कारोबार और रोजगार में बड़ा इज़ाफ़ा होगा।

सरकार मंदिर परिसर में एक स्मारक और सांस्कृतिक संग्रहालय स्थापित करने की तैयारी में है।


अब आगे क्या?

दर्शन के लिए ऑनलाइन पास सिस्टम शुरू किया जा रहा है।

मंदिर परिसर की सभी 14 महत्वपूर्ण मंदिर इकाइयों के लिए अलग-अलग प्रवेश योजना बनाई जा रही है।

रामायण आधारित लाइट-साउंड शो और दर्शन मार्ग का विस्तार प्रस्तावित है।


राम मंदिर का ध्वजारोहण सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय भावनाओं, संस्कृति और संघर्षों का विजय क्षण है। यह वह पल है जिसका इंतजार सदियों से था, और जिसने आस्था, इतिहास और राष्ट्रीय एकता को एक सूत्र में पिरो दिया।

यह मंदिर अब केवल पूजा-स्थल नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाला एक सांस्कृतिक धरोहर केंद्र है।

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