हरियाणा IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार आत्महत्या मामले की जांच
हरियाणा IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या का मामला
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या ने प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 7 अक्टूबर 2025 को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित अपने सरकारी आवास में उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
पूरन कुमार 2001 बैच के IPS अधिकारी थे और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) के पद पर तैनात थे। घटना के समय वे अवकाश पर थे, और उनकी पत्नी आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार जापान दौरे पर थीं।
आत्महत्या नोट में खुलासे
घटनास्थल से एक नौ पृष्ठों का हस्तलिखित नोट बरामद हुआ। इस नोट में पूरन कुमार ने प्रशासनिक उत्पीड़न, जातिवाद, मानसिक उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान का आरोप लगाया। उन्होंने हरियाणा पुलिस के नौ वर्तमान आईपीएस अधिकारी, एक सेवानिवृत्त IPS अधिकारी और तीन सेवानिवृत्त IAS अधिकारियों के नाम नोट में लिए।
उनका आरोप था कि ये अधिकारी उन्हें जानबूझकर मानसिक तनाव और उत्पीड़न का शिकार बना रहे थे।
पत्नी अमनीत पी. कुमार का आरोप
अमनीत पी. कुमार ने चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि:
- DGP शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक के SP नरेंद्र बिजारिया ने उनके पति को झूठे मामलों में फंसाया।
- उन्हें लगातार मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था।
- शराब माफिया की ओर से धमकियां भी मिल रही थीं।
- जापान से 15 कॉल आई थीं, जो मामले की जांच में नए सवाल खड़े कर रही हैं।
अमनीत पी. कुमार ने अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग की है।
जांच की दिशा
चंडीगढ़ पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
साथ ही, केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की टीम भी जांच में शामिल है।
अभी तक की जांच से यह सामने आया कि आत्महत्या के पीछे प्रशासनिक उत्पीड़न, जातिवाद और मानसिक दबाव मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
- अंबाला से कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने न्यायिक जांच की मांग की है।
- उन्होंने कहा कि आत्महत्या नोट में जिन अधिकारियों के नाम हैं, उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
- यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ FIR दर्ज की जानी चाहिए।
- उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक भेदभाव और उत्पीड़न की समस्या को गंभीरता से लेने की आवश्यकता बताई।
निष्कर्ष
वाई पूरन कुमार की आत्महत्या न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि हरियाणा पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में जातिवाद, मानसिक उत्पीड़न और भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों को भी उजागर करती है।
इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है, ताकि दोषियों को उचित सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
