हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की संदिग्ध आत्महत्या: पोस्टमॉर्टम और राजनीतिक-समाजिक हलचल
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या ने राज्य और चंडीगढ़ को हिला कर रख दिया है। 7 अक्टूबर 2025 को सेक्टर-11, चंडीगढ़ स्थित अपने सरकारी आवास में हुई इस घटना के आठ दिन बाद, अब परिवार ने पोस्टमॉर्टम के लिए सहमति दे दी है। इससे पहले, परिवार की असहमति के कारण पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया रुकी हुई थी। प्रशासन और परिवार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद यह सहमति बनी है। पोस्टमॉर्टम से उम्मीद की जा रही है कि मृत्यु के कारण और उससे जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि हो सकेगी।
परिवार की मांगें और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
परिवार ने स्पष्ट किया था कि एफआईआर में एससी/एसटी एक्ट की सख्त धाराएं शामिल हों और दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो। प्रशासन ने उनकी मांगों को ध्यान में रखते हुए एफआईआर में ये धाराएं जोड़ दी हैं। हालांकि, पोस्टमॉर्टम और शव की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। प्रशासन ने परिवार को आश्वस्त किया है कि प्रक्रिया सम्मानपूर्वक और पारदर्शितापूर्वक पूरी होगी।
इस घटना ने सामाजिक और राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित किया है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के कार्यकर्ताओं ने न्याय की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि वाई पूरन कुमार ने जातिगत उत्पीड़न और मानसिक दबाव के चलते आत्महत्या की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा, जिसमें दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की गई।
जींद में खाप पंचायत की बैठक और निष्पक्ष जांच की मांग
जींद में खाप पंचायतों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों, व्यापारियों, छात्रों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कुल 36 बिरादरी के प्रतिनिधियों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। पंचायत ने कहा कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, दोषियों को सख्त सजा दी जाए, लेकिन किसी निर्दोष को फंसाया न जाए। यह मांग हरियाणा सरकार और राज्यपाल को सौंप दी गई है।
जन-विश्वास रैली पर असर
इस घटना के कारण हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली ‘जन विश्वास-जन विकास’ मेगा सेलिब्रेशन रैली, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी प्रस्तावित थी, को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय सामाजिक और राजनीतिक तनाव को देखते हुए लिया गया। वहीं, पत्नी आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार द्वारा उठाई गई मांगों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।

निष्कर्ष: संवेदनशीलता और न्याय की चुनौती
वाई पूरन कुमार की असमय मृत्यु ने राज्य में सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव बढ़ा दिया है। परिवार, राजनीतिक पार्टियां और समाज सभी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। प्रशासन के लिए यह चुनौती है कि संवेदनशीलता बनाए रखते हुए जांच पूरी हो और दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा मिले।
