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राजसमंद में दिल दहला देने वाली वारदात — मां पर नवजात की हत्या का आरोप

राजस्थान के राजसमंद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया।
अस्पताल से डिलीवरी के बाद घर लौटी महिला पर आरोप है कि उसने अपने नवजात बच्चे की गला घोंटकर हत्या कर दी।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपी मां को अस्पताल से डिस्चार्ज के बाद गिरफ्तार करने की तैयारी की जा रही है।


क्या है पूरा मामला

मामला चूरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक गांव का है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला ने कुछ दिन पहले राजकीय अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था।
लेकिन जन्म के कुछ ही घंटे बाद बच्चे की सांस रुकने और गर्दन पर निशान मिलने से डॉक्टरों को शक हुआ।

परिजनों ने बताया कि “बच्चा पैदा होते ही गुढ्डी बोली — इसे कौन पालेगा? घर की हालत खराब है, पति बीमार है।”

घर लौटने के बाद जब बच्चा रोया नहीं, तो महिला ने कथित तौर पर उसका मुंह दबा दिया, जिससे बच्चे की दम घुटने से मौत हो गई


पुलिस की शुरुआती जांच

डॉक्टरों ने जब बच्चे की मौत पर संदेह जताया, तो रिपोर्ट पुलिस को भेजी गई।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया और रिपोर्ट में गला दबाने के निशान पाए गए।

इसके बाद पुलिस ने मामले में IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत केस दर्ज किया।
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपी महिला का पति पिछले 10 साल से बीमार है और घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार —
“महिला मानसिक और आर्थिक दबाव में थी, और उसने गुस्से या निराशा में ऐसा कदम उठाया।”


दोनों बहनें एक ही घर में

मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई — आरोपी महिला गुढ्डी देवी और उसकी बहन इसी घर में रहती थीं।
दोनों की डिलीवरी एक ही समय के आसपास हुई थी।
घर में पहले से ही चार बच्चे थे और परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था।

परिवार के एक सदस्य ने कहा —
“घर में खाना तक मुश्किल से चलता है। गुढ्डी बार-बार कहती थी कि एक और बच्चे को कैसे पालेंगे।”


सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव की भूमिका

इस पूरे मामले ने समाज में गरीबी, मानसिक स्वास्थ्य, और महिला तनाव पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि परिवार को पहले से ही मदद और काउंसलिंग की जरूरत थी।
अगर सही समय पर सहायता मिलती, तो शायद यह हादसा टल सकता था।

एक महिला पंचायत सदस्य ने कहा —
“यह हत्या नहीं, मजबूरी का परिणाम है। लेकिन कानून इसे अपराध मानता है, इसलिए न्यायिक कार्रवाई जरूरी है।”


आर्थिक तंगी और सामाजिक उदासीनता

जांच में यह भी सामने आया है कि महिला का पति दस साल से बिस्तर पर था,
घर में कमाने वाला कोई नहीं था, और सरकारी योजनाओं का लाभ भी सही से नहीं मिल पा रहा था।
इस कारण परिवार पर कर्ज बढ़ गया था और महिला मानसिक रूप से टूट चुकी थी।


कानूनी प्रक्रिया और आगे की जांच

पुलिस ने बताया है कि आरोपी मां को अस्पताल से छुट्टी मिलते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
फिलहाल उसे सुरक्षा निगरानी में रखा गया है।
शव को पोस्टमार्टम के बाद दफनाने की अनुमति दे दी गई है, और मामले की आगे की जांच एसपी स्तर पर जारी है।

“साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं, और महिला के मानसिक स्वास्थ्य की जांच भी कराई जाएगी,”
जांच अधिकारी, राजसमंद पुलिस।


समाज के लिए संदेश

यह घटना केवल अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक विफलता का प्रतीक है —
जहां गरीबी, अवसाद और सामाजिक असंवेदनशीलता ने एक मां को अपनी ममता भूलने पर मजबूर कर दिया।

अब सवाल यह है —
“क्या यह एक अपराध है या एक ऐसी त्रासदी, जिसे समाज ने खुद जन्म दिया?”

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