भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत कौन है जानें
नई दिल्ली, 25 अक्तूबर: देश की सर्वोच्च अदालत में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी शुरू हो चुकी है। वरिष्ठता के क्रम के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्य कांत को भारत का 53वां मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनाए जाने की संभावना है। अगर सब कुछ तय समय पर हुआ तो वे 23 नवंबर 2025 को वर्तमान CJI न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के सेवानिवृत्त होने के बाद पदभार ग्रहण करेंगे।
हरियाणा से निकलकर सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
न्यायमूर्ति सूर्य कांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में हुआ। उन्होंने 1984 में वकालत शुरू की और 2000 में हरियाणा के एडवोकेट जनरल बने। 2004 में वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज नियुक्त हुए और 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
24 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। अब लगभग चार दशक लंबे न्यायिक करियर के बाद वे देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक पहुंचने जा रहे हैं।
संवैधानिक और सामाजिक सोच के लिए जाने जाते हैं
न्यायमूर्ति सूर्य कांत अपने फैसलों में संविधान की आत्मा और सामाजिक न्याय पर खास जोर देते रहे हैं। वे बार-बार इस बात को रेखांकित करते हैं कि “न्याय केवल कानूनी तर्कों का परिणाम नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों तक न्याय पहुँचाने का साधन है।”
उन्होंने कानूनी सहायता (Legal Aid), मध्यस्थता (Mediation) और न्यायिक नैतिकता (Judicial Ethics) को लेकर कई अहम टिप्पणियां की हैं। उनका मानना है कि वैकल्पिक विवाद निपटान (ADR) को “संविधान-संगत मूल्य” के रूप में अपनाना समय की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट में अहम टिप्पणियाँ और फैसले
लोकतांत्रिक असहमति पर: किसान आंदोलन से जुड़े मामलों में उन्होंने कहा कि “असहमति लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन यह सार्वजनिक हित की सीमाओं के भीतर रहनी चाहिए।”
सोशल मीडिया पर: उन्होंने साफ कहा कि “सोशल मीडिया एक प्रभावशाली माध्यम है, लेकिन न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।”
प्रशासनिक जवाबदेही पर: एक फैसले में उन्होंने टिप्पणी की कि “लोकतांत्रिक शासन केवल बहुमत नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं का पालन भी है।”
53वें CJI के रूप में प्राथमिकताएँ
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि CJI सूर्य कांत का कार्यकाल न्यायपालिका को तेज़, सुलभ और पारदर्शी बनाने पर केंद्रित रहेगा।
- वे न्याय तक पहुँच को आम नागरिकों के लिए आसान बनाना चाहेंगे।
- ई-कोर्ट्स और डिजिटल जस्टिस सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम कर सकते हैं।
- मध्यस्थता और वैकल्पिक समाधान को न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाने पर जोर दे सकते हैं।
क्षेत्रीय विविधता और नया दृष्टिकोण
न्यायमूर्ति सूर्य कांत हरियाणा से आने वाले पहले व्यक्ति होंगे जो देश के मुख्य न्यायाधीश बनेंगे। उनकी नियुक्ति न केवल वरिष्ठता परंपरा को बरकरार रखती है, बल्कि न्यायपालिका में क्षेत्रीय और सामाजिक विविधता को भी सशक्त करती है।

निष्कर्ष
सूर्य कांत का संभावित कार्यकाल भारतीय न्यायपालिका के लिए नई दिशा तय कर सकता है। वे ऐसे दौर में नेतृत्व संभालेंगे जब कोर्ट पर पारदर्शिता, तेजी और जनता के भरोसे को बनाए रखने की चुनौती सबसे बड़ी है।
उनकी संवेदनशील और संविधान-आधारित सोच यह संकेत देती है कि सुप्रीम कोर्ट आने वाले वर्षों में और अधिक जन-केन्द्रित और सुलभ न्याय प्रणाली की ओर बढ़ेगा।
