दीपावली के बाद कहा कितनी जहरीली हुई हवा देखें सरकारी आंकड़े
वायु गुणवत्ता सूचकांक में भारी गिरावट
दीवाली 2025 के बाद हरियाणा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में अत्यधिक गिरावट देखी गई है। कई जिले ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणियों में पहुँच गए हैं। यह स्थिति मुख्य रूप से पटाखों से होने वाले प्रदूषण, वाहनों से उत्सर्जन और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण उत्पन्न हुई है।

हरियाणा के प्रमुख जिलों का AQI (22 अक्टूबर 2025)
| जिला/शहर | AQI (24 घंटे का औसत) | श्रेणी |
|---|---|---|
| जींद | 421 | गंभीर |
| धारूहेड़ा (रेवाड़ी) | 412 | गंभीर |
| नारनौल | 390 | बहुत खराब |
| रोहतक | 376 | बहुत खराब |
| गुरुग्राम | 370 | बहुत खराब |
| बहादुरगढ़ | 368 | बहुत खराब |
| चर्की दादरी | 362 | बहुत खराब |
| सिरसा | 353 | बहुत खराब |
| फतेहाबाद | 320 | बहुत खराब |
| पानीपत | 231 | बहुत खराब |
प्रदूषण के प्रमुख कारण
- पटाखों का धुआं: दीवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाले धुएँ में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे प्रदूषक कण शामिल हैं, जो वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
- वाहन उत्सर्जन: शहरों और राष्ट्रीय/highways पर वाहनों से निकलने वाला धुआं AQI बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाता है।
- मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियाँ: कम हवा की गति और तापमान में गिरावट ने प्रदूषकों के फैलाव को रोक दिया, जिससे AQI और खराब हुआ।
सुरक्षा उपाय
उच्च स्तर के प्रदूषण से बचाव के लिए विशेषज्ञों द्वारा कुछ सुरक्षा उपाय सुझाए गए हैं:
- घर के अंदर रहें: बाहरी प्रदूषण से बचने के लिए घर के अंदर रहना सुरक्षित है।
- मास्क का उपयोग करें: N95 या FFP2 मास्क पहनने से प्रदूषण कणों से सुरक्षा मिलती है।
- स्वास्थ्य पर ध्यान दें: अस्थमा, COPD या अन्य श्वसन समस्याओं वाले व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
- हवा के शुद्धिकरण का इस्तेमाल करें: घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग वायु प्रदूषण के प्रभाव को कम करता है।
- पानी और हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पीने से शरीर में मौजूद प्रदूषक पदार्थ बाहर निकलने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
दीवाली 2025 के बाद हरियाणा में AQI का स्तर बेहद चिंताजनक है। जींद और धारूहेड़ा ने पूरे राज्य में सबसे खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की है। उपभोक्ताओं और नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे प्रदूषण से सुरक्षा के उपाय अपनाएँ और आवश्यक होने पर घर के अंदर रहें। प्रशासन और स्थानीय सरकार को चाहिए कि वे आगामी त्योहारों और प्रदूषण के उच्च स्तर वाले समय में विशेष उपाय करें ताकि स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम किया जा सके।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि दीवाली के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के उपाय अपनाना और सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। इससे आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सकता है।
