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जींद से सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन: 25 रुपये में हरित यात्रा, जींद बनेगा देश की ग्रीन रेल क्रांति का केंद्र

जींद
हरियाणा के जींद से शुरू होने जा रही देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन न सिर्फ रेल यात्रा की तस्वीर बदलेगी, बल्कि ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी साबित होगी। जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली इस अत्याधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन का अधिकतम किराया महज 25 रुपये तय किया गया है, जिससे आम यात्रियों को सस्ती, तेज और प्रदूषण-मुक्त यात्रा का लाभ मिलेगा।

करीब 89 किलोमीटर लंबे इस रूट पर यह ट्रेन कुल सात स्टेशनों पर रुकेगी और यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ नया सफर अनुभव कराएगी। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार की गई यह हाईटेक ट्रेन नॉर्दर्न रेलवे के दिल्ली डिवीजन को सौंपी जा चुकी है। जानकारी के अनुसार, 31 मार्च 2025 से ट्रायल शुरू हो चुका है और 20 जनवरी 2026 के बाद नियमित परिचालन की तैयारी अंतिम चरण में है।

ये होंगे स्टेशन

यह ट्रेन जींद जंक्शन से चलकर जींद सिटी, पांडु-पिंडारा, भंभेवा, गोहाना जंक्शन, मोहाना (हरियाणा) होते हुए सोनीपत जंक्शन तक पहुंचेगी।

किराया बेहद किफायती

  • जींद सिटी / पांडु-पिंडारा: 5 रुपये
  • भंभेवा: 10 रुपये
  • गोहाना: 15 रुपये
  • मोहाना: 20 रुपये
  • सोनीपत: 25 रुपये

समय और पैसे—दोनों की बचत

जहां मौजूदा डीएमयू ट्रेनें यह दूरी तय करने में करीब दो घंटे लेती हैं, वहीं हाइड्रोजन ट्रेन लगभग एक घंटे में यह सफर पूरा करेगी। इससे रोज़ाना अप-डाउन करने वाले नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और व्यापारियों को बड़ा फायदा होगा।

शून्य प्रदूषण, भविष्य की तकनीक

यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है, जिसमें डीजल की जगह हाइड्रोजन से बिजली पैदा होती है। इसके परिणामस्वरूप केवल पानी और गर्मी निकलती है—धुआं, कार्बन उत्सर्जन या प्रदूषण बिल्कुल नहीं। ट्रेन की अनुमानित रफ्तार 110 से 140 किमी प्रति घंटा है और इसमें करीब 2638 यात्रियों के सफर की क्षमता होगी।

जींद के लिए गेम-चेंजर प्रोजेक्ट

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का होम स्टेशन जींद बनने से शहर को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। साथ ही, यहां हाइड्रोजन प्रोडक्शन और री-फ्यूलिंग स्टेशन, हाईटेक इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं के लिए सैकड़ों नई नौकरियों के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सड़क यातायात का दबाव और प्रदूषण दोनों घटने की संभावना भी जताई जा रही है।

देशभर में होगा विस्तार

रेलवे का लक्ष्य है कि इस मॉडल के सफल होने पर आने वाले वर्षों में देशभर के चुनिंदा रूटों पर 35 तक हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएं। ऐसे में जींद–सोनीपत रूट पूरे देश के लिए ग्रीन रेलवे का अग्रणी उदाहरण बन सकता है।

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