चम्बा में BJP विधायक हंस राज पर गंभीर आरोप — युवती ने कहा, “बंधक बनाया गया, बयान बदलवाए गए”
हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
एक 21–22 वर्षीय युवती ने भाजपा विधायक हंस राज पर शारीरिक शोषण, अनुचित संदेश भेजने, वीडियो से ब्लैकमेल करने और परिवार को धमकाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
यह मामला अब प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है और महिला सुरक्षा, सत्ता के दुरुपयोग और राजनीतिक नैतिकता पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है।
पीड़ित परिवार की शिकायत — ‘किडनैप कर बयान बदलवाए’
युवती के पिता ने थाना तिस्सा (चम्बा) में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पिछले वर्ष पीड़िता और उसके पिता को जबरन अगवा कर लिया गया था।
उन्हें शिमला ले जाकर बंधक बनाया गया और दबाव डालकर बयान बदलवाए गए।
परिवार का कहना है कि “हम पर लगातार दबाव बनाया गया कि हम केस वापस लें, वरना गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”
पुलिस ने इस मामले में विधायक के निजी सहायक (PA) और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ अपहरण, धमकी, और आपराधिक दबाव की धाराओं में FIR दर्ज की है।
हालांकि, विधायक हंस राज का नाम FIR में अभी तक आरोपी के रूप में नहीं जोड़ा गया है।
विधायक का जवाब — ‘यह राजनीतिक साजिश है’
विधायक हंस राज ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश है।
उन्होंने कहा — “मेरे खिलाफ झूठी कहानी रची जा रही है ताकि मेरी छवि खराब हो और आगामी चुनाव में राजनीतिक नुकसान पहुंचाया जा सके।”
उनका कहना है कि वे जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन सत्य सामने आने के बाद जनता सब समझ जाएगी।
जांच की स्थिति और पुलिस कार्रवाई
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और FIR की कॉपी राज्य महिला आयोग को भी भेजी गई है।
जिला पुलिस अधीक्षक (SP) ने कहा है कि मामले की जांच सीनियर अफसरों की निगरानी में की जा रही है।
“हमने पीड़िता का बयान दर्ज किया है और तकनीकी सबूतों की जांच की जा रही है। जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।” — पुलिस अधिकारी
इस बीच, प्रशासन ने पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश भी जारी किए हैं।
राजनीतिक हलचल और विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस मामले ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
विपक्षी दलों ने इस पर सरकार से तत्काल कार्रवाई और विधायक को अस्थायी निलंबन की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, आरोपी को पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ताओं ने कहा है कि पार्टी कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करती है और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचेगी।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है
यह मामला सिर्फ एक राजनीतिक व्यक्ति से जुड़ा नहीं, बल्कि सत्ता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन का परीक्षण भी है।
एक निर्वाचित विधायक पर ऐसे आरोप लगना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
- यह मामला महिला सुरक्षा और न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा है।
- जांच का निष्पक्ष और पारदर्शी होना राज्य सरकार की छवि और जनता के विश्वास के लिए आवश्यक है।
- साथ ही, यह मामला आने वाले चुनावी समीकरणों और पार्टी छवि पर भी असर डाल सकता है।
🔹 आगे की राह
आगामी दिनों में पुलिस —
- तकनीकी साक्ष्य (वीडियो, कॉल रिकॉर्डिंग) की जांच करेगी,
- पीड़िता के बयान को मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज करेगी,
- और आवश्यकता पड़ने पर FIR में नए नाम जोड़े जा सकते हैं।
राज्य महिला आयोग और सामाजिक संगठन भी इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।
एक वरिष्ठ वकील ने कहा — “ऐसे मामलों में न्यायिक निगरानी जरूरी है ताकि किसी भी पक्ष को राजनीतिक प्रभाव से फायदा न हो।”
अब देखना यह होगा कि जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और क्या आरोपी विधायक के खिलाफ ठोस सबूत सामने आते हैं।
